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बेरंग सी हैं ज़िन्दगी

बेरंग सी हैं ज़िंदगी  बेरंग सी हैं ज़िन्दगी आँखों से बहती हैं हर खुशी यादों ने छुपा के रखी थी जो कही आहहह बेरंग सी हैं ज़िन्दगी हां आँखों से बहती हैं हर खुशी  ढूंढ के ला वो वजह तो ज़रा, वो गुनहा तो बता जिसकी मिली हैं मुझको आज ये सजा।। उसके आँचल तले कटे ये ज़िन्दगी सारी, इतनी सी थी मेरी इल्तज़ा तुझसे ऐ खुदा।। क्यों दिखाई तुने मुझसे इतनी बेरूखी ये बता क्यों भरा तूने ये रंग, क्यों मिली हैं मुझकों ये सजा।।। क्या चाहत बेपनाह देखी हैं तूने कही उसके लिए तोह बता।। बे रंग सी हैं ज़िन्दगी!! यूँ खामोश दिल ये कब तक सहे यादों के वो घाव जिनकी इस दुनिया में नही हैं कोई दावा।। सजा के रखू इन घावों को या में बह जाऊ तेरी बेरुखी के साथ इतना तो बता बेरंग सी है जिंदगी  क्या रखू में तुझसे इंसाफ की उम्मीद अब इन काले रास्तों से जो मिलाया है तूने मुझे इस कदर  क्या इंसाफ की उम्मीद रखूं ओर जाऊँ किस डगर  बन जाऊँ रंगरेज भूला दूँ तस्वीर तेरी और मिटा दूँ में उसके भी निशा।। भर दूँ तेरी बक्शी इस जिंदगी में वो रंग  तू भी देख कर कतरा जाए कि मेरे जीने ये ढंग  रंग दूँ लाल ये ज़मी, भ...