डॉ भीमराव अंबेडकर बाबा साहेब को समर्पित
एक लौ जली तूफानों में, कुछ मकसद अपने साथ लिए। अपने और अपने जैसे हज़ारों की आवाज़ लिए। प्रचंड रूप अख्तियार किया। हर मुश्किल पे अपनी सूझ बूझ से वार किया। मंदिरों, जलाशयों, स्कूलों से वंचित वर्गों का उद्धार किया। लिख कर संविधान मनुवाद का नाश किया। इस भारत देश में मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया। आपके प्रयासो ने इस देश में दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यको को समानता का अधिकार दिया। बांध कर हाथ कानून से मानवता को शर्मशार करती जातियों का नाश किया। क्या खूब दीया जलाया एकता का, इस संसार को एक सूत्र का स्वप्न दिया। अफसोस मगर हम नाकाम रहे, समझने में आपके विचारों कोे घिरे हुए हैं आज भी अपने ही घर में, ऊँच नीच की दीवारों में। और लड़ रहे हैं, अकेले- अकेले मनुवादी सोच की अंतिम पीढ़ी से, क्या मिलेगी सफलता हमें, इन कमजोर कोशिशों से। एक हुंकार उठे, सबका एक धर्म के झंडे के नीचे स्थान बने। नींव इसकी अपने-अपने आंगनों की ऊँच नीच और भेदभाव की दीवारों की ईंटो से बने। सबका साथ मिले, एक बार फिर इंसानियत को निगलती मनुवादी सोच को उसका अंजाम मिले। इन साँपों को एक करारा प्रहार मिले। बाबा साहेब ...