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मै : कलयुग में सबसे बड़ा शत्रु

मेरे व्यक्तित्व  की औक़ात मेरे तमाम सपनों की औक़ात से ज्यादा है  तो अगर तुम सोच रहे हो मै बदल जाऊँगा अगर तुम नहीं बदले तो मै हमेशा यहीँ पाया जाऊँगा  ऊँचे पर्वतों, आसमानों की ऊंचाई इतनी नहीं की मुझे गुरूर दे मै मेरे व्यक्तित्व से और अपने फैसलों से खुश हूँ कोई कितना भी उल्हाना दे मुझे मेरे फैसलों के लिए चुना मैने हमेशा वही जो सबके लिए सही था और हमेशा यही करुँगा नासमझे जाने का मुझे कोई भय नहीं  तुम हो ना हो मै यही रहूँगा जो सोचो मै बदल जाऊँगा तो तुम्हारा विश्वास मेरे लिए विश्वसनीय नहीं तुम्हारी कल्पनाओं से परे हूँ मैं, तो कयास कोई लगाना नहीं मुझसे प्रिय मेरे लिए कोई नहीं ये मेरा, मेरे प्रति करुणामय व्यवहार है मै हूँ, मै था और मैं रहूँगा कोई हो ना हो, कोई रहे ना रहे मै रहूँगा

मुसाफिर

 मेरा दिल एक राही है तुम एक सराया हो बस तुम जो कीमत माँगोंगे मिलेगी जब तक चाहो मैं यहाँ ठहरा रहूँगा बशर्ते मेहमान नवाज़ी मेरे हिसाब की होनी चाहिए जो तुम मांगोंगे मै वो सब दूँगा ना दे पाओ जो मै चाहूँ  तो सामान बाँध देना मेरा और अफसोस ना करना मुतालिक रहूँगा सदा पर फिर लौट आने की उम्मीद मत करना मै मुसाफिर हूँ दिल एक राही इसकी मंज़िल बस एक ही है इस रूहू की इस जिस्म से आजादी बांधने की कोशिश ना करना मेरे लिए सब बंधन बेकार है  मुझ पर सब बेअसर है, मेरे अन्दर सब नदारद है कोई तृष्णा हो या तृष्णा से जन्मा कोई राग द्वश  लोभ, लालच इस सबको मै पीछे छोड़ आय़ा हूँ  या वो कोई रिश्ता हो या ज़मी जायदाद मेरे लिए सब राख है मै कोई योगी नहीं कोई तपस्वी भी नहीं  बस एक मुसाफिर हूँ