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Showing posts from July, 2018

अवसर

                                    अवसर आया तो था मैं तुम्हारे पास मन में सवाल और अपनी बेचैनी साथ लिए आया तो था मैं तम्हारे पास अपने गहरे घावों को सहलाते हुए आया तो था मैं तुम्हारे पास मलहम लगाने की आस लिए आया तो था मैं तुम्हारे पास सुबकते हुए कदमो से, तेरे आँचल में कुछ सुकून के पल बताने के लिए आया तो था मैं तुम्हारे पास अपनी गलतियों गलतफमियो का इज़हार करने के लिए आया तो था मैं तुम्हारे पास तुम्हे कितना चाहता हूँ ये बताने के लिए कहाँ था तुम्हारे पास वक्त मुझे सुनने के लिए। तुमने हर बार मेरे पहले लव्ज़ पे मुझे टोक दिया। ठीक हैं ठीक है सब पता हैं मुझे कह कर हर बार तुमने दरवाजे से ही मुझे जाने को कह दिया। कई बार तो तुमने मेरे आने पे ही सवाल कर दिए। तुम्हारी अच्छाईयों के पन्ने लिखते वक्त स्याही खत्म हो गयी अब  नया अध्याय तुम्हारी बेचैनी, ग़ुरूर,अशांति से भरा है । मैं तो शुरू से ही भिखारी था प्यार का।। और तुम्हे, वो बना गया। आया तो था मैं तुम्हारे पास आज वक़्त ही वक़्त हैं तु...

मानव की क्रूरता ।।।। एक कविता मेरी डायरी से।।।।।

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एक कविता मैं अपनी डायरी से आपके साथ यहाँ साझा कर रहा हूँ। मैं एक स्त्री नही हूँ अतः उसके दर्द को शायद उतनी भलीभाँति बयां ना कर पाया हूँ। इसे मेरी एक कोशिश समझ के स्वीकार करे व अपनी टिप्पणी के माध्यम से अपने विचारो से मुझे अवगत कराएं।