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Showing posts from September, 2019

लेखक

                               लेखक मैं एक लेखक हूँ। मैं एक आईना हूँ। साहित्य कहानी कविता लिखता हूँ। कलम की नोक पर सत्य को रखता हूँ। सच का चोला पहने झूठ का शिकार करता हूँ। मैं मेरी कलम से वार करता हूँ। मेरी कलम ही मेरी तलवार हैं, यही मेरी ढाल भी। मैं एक साहित्यकार हूँ। मैं एक इतिहासकार हूँ। मैं कलम से सोच बदलता हूँ। मैं कलम से रुख बदलता हूँ। मैं भी एक देश सेवक हूँ। इस देश के दुश्मनों पे अपनी कलम से वार करता हूँ। इस कलम से ही मैं इतिहास बदलता हूँ। जागता हूँ सोते हुए लोगो को, हँसता हूँ रोते हुए लोगो को। रुलाता हूँ अट्टहास करते हुए लोगों को  मैं प्यार के पाठ भी पढ़ता हूँ। मैं युद्ध करना भी सिखाता हूँ। मैं एक लेखक हूँ, मैं सबकी गाथा गाता हूँ। मैं सबकी सुनता हूँ। सबके रहले जिगर मैं जगह बनाता हूँ। मैं अपना हर युद्ध कलम से लड़ता हूँ। कमजोर की आवाज बनता हूँ। मैं विध्वंस का सूत्रकार भी। मैं नवनिर्माण का कल्पनाकार भी। म...

गीता: ज्ञान

तेरी जीत के जश्न का साथी नही मैं बस तेरी जीत का अभिलाषी हूँ। मैं तो तेरे संघर्ष का साथी हूँ। सार्थी मात्र हूँ तेरा, जब भी मुश्किल में आये तू प्राण वायु पर ध्यान कर विश्वास से याद करना तेरे साथ ही विचरण करता हूँ हमेशा बस यही याद रखना तेरी जीत के जश्न में हों सब शामिल बस इसी के लिए प्रयत्नशील हूँ। तेरी जीत का साथी नही मैं, मैं तो तेरे संघर्ष का साथी हूँ। जीत तेरी अपनी हैं, हार भी तेरी अपनी हैं। मैं तो एक कर्मकारी हूँ, तेरे संघर्ष का साथी हूँ तेरी जीत का अभिलाषी हूँ।

जिंदगी

क्या गुनहा किया मैंने ए ज़िन्दगी की तू इतनी खफा हो गयी। साँस लेना भी अब तो एक सज़ा हो गयी। चंद दफ़ा झूठ बोला होगा मैंने बस,प्यार पाने के लिए डांट से बचने के लिए, मुझसे ऐसी भी क्या भूल हो गयी। जो सुंकूँ की नींद भी अब दूर हो गयी। ए ज़िन्दगी मुझसे ऐसी क्या ख़ता हो गयी जो तू इतनी खफा हो गयी। कुछ दो चार मर्तबा, माँ के बटुये से अठन्नी चुराके कुल्फी खायीं थीं। इस गुस्ताखी की तो मांफी भी मांगी थी मैंने हर दफा। फिर ए ज़िन्दगी तू इतनी क्या नाराज़ हो गयी अब अस्सी रूपए की कुल्फी से भी वो स्वाद ले गयी। ए जिंदगी तू कब इतनी परायी हो गयी। की साँस लेना भी अब सजा हो गयी। -दीपक कुमार