गीता: ज्ञान

तेरी जीत के जश्न का साथी नही मैं
बस तेरी जीत का अभिलाषी हूँ।
मैं तो तेरे संघर्ष का साथी हूँ।
सार्थी मात्र हूँ तेरा, जब भी मुश्किल में आये तू
प्राण वायु पर ध्यान कर विश्वास से याद करना
तेरे साथ ही विचरण करता हूँ हमेशा
बस यही याद रखना
तेरी जीत के जश्न में हों सब शामिल
बस इसी के लिए प्रयत्नशील हूँ।
तेरी जीत का साथी नही मैं, मैं तो तेरे संघर्ष का साथी हूँ।
जीत तेरी अपनी हैं, हार भी तेरी अपनी हैं।
मैं तो एक कर्मकारी हूँ, तेरे संघर्ष का साथी हूँ
तेरी जीत का अभिलाषी हूँ।

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