वो दिन जिस दिन इंसाफ़ होगा

 पैरवी में तो हम भी जीत जाते तुमसे, खुद की बेगुनाही 

मगर,

अंदाजन यहाँ सब खरीदे गए थे, 

यकीनन मैं एक भी खरीद ना पाया 

ईमानी तोहफे, ईनामी तोहफ़ो से हल्के निकले 

यहाँ तो चद लकीरें कागज़ पर लिखी, तोड़ मरोड़ कर इस्तेमाल कर ली गयी जो न तोड़ी जा सकी वो ख़रीद लीं दौलत वालों ने और बेच दी बेईमानों ने

इस मुकदमें का सही फैसला अब क़यामत की रोज होगा  

क़यामत के दिन तोहमत के ये सब पत्र खोले जाएंगे

किसने बेहिसाब बेवजह माफ़ी नामे लिखे, 

सब हिसाब-किताब निकाले जाएंगे 

जब हर एक को अपने कर्म का जवाब खुद को देना होगा

और उस दिन इंसाफ़ होगा 

उस दिन तक अगर ग्लानि में भी जीना पढ़ा तो जीयूंगा

पर उस दिन का इंतजार जरूर करूंगा 

जिस दिन सत्य का साक्षात्कार करूंगा 

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