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Showing posts from April, 2019

कल्पना: सहयोगनी को समर्पित

तुझसे मिला तो खुद से मिला हूँ मैं। की, जानने की कोशिश तुझे, तो खुद को जान पाया हूँ मैं। मुझे तो एहसास भी नही था, एक लेखक जी रहा हैं मेरे अंदर तेरी खूबसूरती से पहचान मिली मेरे खयालातों को। तू थी साथ तो लिख पाया मैं मेरे जज्बातों को। बेनाम था मैं इस दुनिया की भीड़ में।।। तेरा साथ मिला तो,नाम मेरा गूंज उठा खिताबी समारोहो में। तेरा ही हाथ हैं मेरे अंदर की खूबसूरती को और खूबसूरत बनाने में। मैं तो अनजान था मेरे अन्दर की खूबसूरती से। शुक्रिया मेरे अंदर की खूबसूरती से मुझे मिलाने के लिए। मेरे अंदर उठते नापाक इरादों को, अपने गुस्से से डराने के लिए, अपने आँसूओ से धोने के लिए, अपनी मुस्कान से झुकाने के लिए। मुझे पाक साफ बनाने के लिए। मेरे अधरों पे ये शब्द लाने के लिए। मुझे आम से ख़ास बनाने के लिए। मेरे नाम को पहचान दिलाने के लिए। मेरे नाम के अलावा भी, मैं बहुत कुछ हूँ, ये बताने के लिए। शुक्रिया,मेरे काम से मेरी पहचान करवाने के लिए। शुक्रिया, मुझे एक कामदार इंसान बनाने के लिए।

कत्ल की आज़ादी

यूँ तो 307 में सजा तुझे भी होनी थी। तूने कई बार पलट पलट कर देखा जायजा लिया और हर बार एक ज़ोरदर वार किया। दुख तो तुझे भी बहुत हुआ होगा तेरे हर वार के साथ मैंने मेरे लबों पे एक बूंद पानी की महसूस की थी। सर्दियों का महीना था, तो बारिश भी नही थी आंसमा पे। हमने तो कई किनारे देखे हैं तो तेरे कत्ल किये जाने का दुख तो था, मगर इतना भी नही की डूब जाएं यादें मिटाने को। उस पल लगा वो आँसू ही होगा जो अधरों पे गिरा मेरे और जीने की वजहा दे गया। तू चली गयी सुबहा होते ही और तूने पलट कर भी नही देखा। कुछ सांसे यादों के सहारे मुठी में छोड़ गई थी तू। तेरा कुछ था कीमती उसे भूल गयी थी तू। उसने एक गर्मी सी दी औऱ बा किस्मत एक नीति ने जहाज से हाथ बढ़ाया, कुछ दिनों में होश आया। मैं चला आया वहाँ से, शुक्रिया कहना भी भूल गया उसे। मेरी बेरुखी शायद दुख दे गई उसे तो उसने भी मुझसे नाम नहीं पूछा। ख़बर लगी तू खुश हैं उस वाखिये के बाद भी तो उन आँसूओ पे यकीन धुंधला सा हो गया एक पल मैं। फिर लगा झल्लावा होगा दुनिया को क्योंकि ये आँसू  गुन्हेगारो का साथ नही देते। वक़्त गुज़रा और इंतज़ार रहा तेरी मुस्कुराहट के मल...