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Showing posts from April, 2021

ये उम्मींद!

ये उम्मीद क्यूँ खत्म नहीं होती उसके लौट आने की की उनकी यादों में लिपटे जिस्म के हर हिस्से को हम जला के बैठे है उन्हें भुलाने के हर मुमकिन रास्तो पर हम हार के बैठे है मौत एक मुमकिन रास्ता लगता था उन इरादों में भी हम नाकाम होकर बैठे है की ये उम्मीद खत्म क्यूँ नहीं होतीं  अब तो हम सब जला कर बैठे है उनकी सब हिदायतों का उल्लंघन कर के बैठे हैं  वो भी उन तमाम आने के रास्तों पर ताला लगा के बैठे है और इसकी जानकारी हमे देकर निश्चित होकर बैठे हैं  की ये प्यास कब बुझेगी, की ये उम्मीद कब खत्म होगी, इसी उम्मीद में,  बंद कमरे में बेहिसाब खाली बोतलों से घिरे बैठे है  इतला कर दिया उन्होंने हमे कई मर्तबा वो इश्क नहीं, बस बचपन की नादानी थी फिर भी उन्हें आज तक साथ लिए बैठे हैं  टुकड़ों में बिताए सफ़र को अब तक गले से लगा के बैठे है जिस्म का हर हिस्सा उसकी यादों में लिपटा है, ज़िक्र हो ही जाता है जाने अनजाने, अब  हर दर्द, गम को सिगरेट के धुएँ, शराब और मुस्कराहट से ढक कर बैठे है की ये उम्मीद खत्म क्यूँ नहीं होती  अब तो हम सब जला के बैठे है

To My Friend (D viru)

The girl who is sitting left to me Born with the smile.  She carries a lot of pain in her heart, doesn't let it come on her face and just simply smile.  Strong enough to shake the throne.  Don't mess with her she has got empowered by godly thoughts Don't go on her crazy attitude which she shows sometimes.   because.  Parallelly her mind working on some serious issue inside.  Get mad when feeling hungry, almost eat tons and tons of calories in one time.  Talks a lot about her aim, take hours and hours of sleep to see them fulfilled in her dreams at the same time. She loves purchasing books a lot, but not reading them at all.  It is equally strange that she tops every time in the class.  Still, she is the craziest, best friend of mine.  Hope her every dream come true, may she become a shining star. Oh, dear! You are such a craziest person I met ever.  You are the person I have seen with no ends, bigger than the ocean, fathomless ...

बस मानव हूँ

 मेहनत में नीच जात युद्ध में जाट जुबान में वैश्य  सम्मान में राजपूत  ज्ञान में ब्राह्मण  मेरी कोई जात नहीं, मैं बस मानव हूँ  अपने तुच्छ नजरिए से मुझे ना आंकन ए अबोध जुबान का पक्का हूँ  मल्ल में हरा भी सकता हूँ  काम करते वक्त वस्त्र मैले भी हो तो मलाल नहीं सर कटा दूँ किसी के सम्मान की रक्षा में तो अफसोस नहीं  ज्ञान से जीत लूँ प्रतिद्वंद्विता तो करना तुम अचंभा नहीं  मै मानव हूँ, और ये सब कुछ जानता हूँ  मै बस मानव हूँ, जात पात से परे मै एक इंसान हूँ  एक आत्मा हूँ, प्रेम से सराबोर हूँ  मै बस एक मानव हूँ