बस मानव हूँ

 मेहनत में नीच जात

युद्ध में जाट

जुबान में वैश्य 

सम्मान में राजपूत 

ज्ञान में ब्राह्मण 

मेरी कोई जात नहीं, मैं बस मानव हूँ 

अपने तुच्छ नजरिए से मुझे ना आंकन ए अबोध

जुबान का पक्का हूँ 

मल्ल में हरा भी सकता हूँ 

काम करते वक्त वस्त्र मैले भी हो तो मलाल नहीं

सर कटा दूँ किसी के सम्मान की रक्षा में तो अफसोस नहीं 

ज्ञान से जीत लूँ प्रतिद्वंद्विता तो करना तुम अचंभा नहीं 

मै मानव हूँ, और ये सब कुछ जानता हूँ 

मै बस मानव हूँ, जात पात से परे मै एक इंसान हूँ 

एक आत्मा हूँ, प्रेम से सराबोर हूँ 

मै बस एक मानव हूँ


Comments

Popular posts from this blog

बस डटे रहना

आज का नेता

वो दिन जिस दिन इंसाफ़ होगा