एक दिन तुम बदल ही जाओगी
मेरी गुजारिश उस हर पल को और उस के भी पल को जीने की रहीं तुम्हारी निगाहें बस अंतिम परिणाम पर रहीं मै कोशिश करता रहा तुम समझ जाओ बिना परिणाम की परहवा किये बस हाथ थाम कर चलती चली जाओ तुम्हें ये मंजूर ही नहीं था, मैं मेरे विश्वास को सुदृढ़ करता चला गया की एक दिन तुम मेरे यहां रहते-रहते बदल ही जाओगी तुम हर बार मुझे गलत साबित करती गयी, और मुझसे कहती रहीं वो घड़ी कभी नहीं आएगी ना तुम बदली ना मुझे ही लगा तुम सही हो गम फ़िर भी सब, बस मेरे हवाले तुम खुश रहो तुम्हारे रास्ते मैं ही चला जाता हूँ किसी और किनारे पर देखना एक दिन तुम बदल ही जाओगी, पर उस दिन मुझे दूर दूर तक भी कहीं नहीं पाओगी