आज का नेता
मांस नोच खाने को बेताब गिद्ध सफेद पोश में। क्या खुशहाली , हरियाली की बात करेगें। लिए मंच पे ध्वनि संप्रेषक और भोंपू, बस तुम्हें गुमराह करेगें। बातें ऊंची-ऊंची, एक दूसरे पर लांछन लगाने की नीति और इसी आधार, पर फिर होगी वोट की विनती फिर जीत गए तो, पांच साल खायेंगे तुमसे छीन-छीन कर तुम्हारी ही रोटी नहीं जीते वो सर्वनाश के होंगे अधिकारी, बटोर के ले जायेंगे, बाकी बची थाली तुम्हारी। धूल उड़ाती गाड़ी में बैठे- बैठे शासन के पूरे साल गए, बजट को, दौरे,भ्रमण और प्रचार खा गए। ये नेता की अब जात रही, खुशहाली और हरियाली की बात, बस बात रही। कहां सुभाष, लाल बहादुर शास्त्री, भगत सिंह से लाल रहे। उफ्फ तक न किया, और देश पर अपना सब कुछ वार गये।