लेखक


                               लेखक
मैं एक लेखक हूँ। मैं एक आईना हूँ।
साहित्य कहानी कविता लिखता हूँ।
कलम की नोक पर सत्य को रखता हूँ।
सच का चोला पहने झूठ का शिकार करता हूँ।
मैं मेरी कलम से वार करता हूँ।
मेरी कलम ही मेरी तलवार हैं, यही मेरी ढाल भी।
मैं एक साहित्यकार हूँ। मैं एक इतिहासकार हूँ।
मैं कलम से सोच बदलता हूँ।
मैं कलम से रुख बदलता हूँ।
मैं भी एक देश सेवक हूँ।
इस देश के दुश्मनों पे अपनी कलम से वार करता हूँ।
इस कलम से ही मैं इतिहास बदलता हूँ।
जागता हूँ सोते हुए लोगो को, हँसता हूँ रोते हुए लोगो को।
रुलाता हूँ अट्टहास करते हुए लोगों को 
मैं प्यार के पाठ भी पढ़ता हूँ।
मैं युद्ध करना भी सिखाता हूँ।
मैं एक लेखक हूँ, मैं सबकी गाथा गाता हूँ।
मैं सबकी सुनता हूँ। सबके रहले जिगर मैं जगह बनाता हूँ।
मैं अपना हर युद्ध कलम से लड़ता हूँ।
कमजोर की आवाज बनता हूँ।
मैं विध्वंस का सूत्रकार भी।
मैं नवनिर्माण का कल्पनाकार भी।
मैं एक सुखद जीवन की अभिलाषा का कर्णकार हूँ।
न्याय का साथी हूँ।
मैं एक लेखक हूँ। मैं एक कहानीकार भी।
भूत भी हूँ,वर्तमान भी।
भविष्य की कल्पना कर शब्दों मैं सजाता हूँ।
मैं लोगो को सपने देखना सिखाता हूँ।
मैं एक लेखक हूँ। सबकी कहानी सुनाता हूँ।
मर कर भी इसलिए, अमर हो जाता हूँ।
मैं एक लेखक हूँ, मैं एक कलाकार हूँ।
एक नई दुनिया का चित्रकार भी।
मैं आदि हूँ, मैं अंत भी।
मैं अनंत हूँ! 
मैं एक लेखक हूँ सबकी सुनाता हूँ।
कोई पक्षपात नही करती कलम मेरी
मैं सत्य का साथी हूँ, मैं एक चमत्कारी हूँ।
मैं एक लेखक हूँ। मैं एक लेखक हूँ।

@#दीपक कुमार

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