मुसाफिर

 मेरा दिल एक राही है

तुम एक सराया हो बस

तुम जो कीमत माँगोंगे मिलेगी

जब तक चाहो मैं यहाँ ठहरा रहूँगा

बशर्ते मेहमान नवाज़ी मेरे हिसाब की होनी चाहिए

जो तुम मांगोंगे मै वो सब दूँगा ना दे पाओ जो मै चाहूँ 

तो सामान बाँध देना मेरा और अफसोस ना करना

मुतालिक रहूँगा सदा पर फिर लौट आने की उम्मीद मत करना

मै मुसाफिर हूँ दिल एक राही

इसकी मंज़िल बस एक ही है

इस रूहू की इस जिस्म से आजादी

बांधने की कोशिश ना करना

मेरे लिए सब बंधन बेकार है 

मुझ पर सब बेअसर है, मेरे अन्दर सब नदारद है

कोई तृष्णा हो या तृष्णा से जन्मा कोई राग द्वश 

लोभ, लालच इस सबको मै पीछे छोड़ आय़ा हूँ 

या वो कोई रिश्ता हो या ज़मी जायदाद

मेरे लिए सब राख है

मै कोई योगी नहीं कोई तपस्वी भी नहीं 

बस एक मुसाफिर हूँ


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