मै : कलयुग में सबसे बड़ा शत्रु

मेरे व्यक्तित्व  की औक़ात मेरे तमाम सपनों की औक़ात से ज्यादा है 

तो अगर तुम सोच रहे हो मै बदल जाऊँगा

अगर तुम नहीं बदले तो मै हमेशा यहीँ पाया जाऊँगा 

ऊँचे पर्वतों, आसमानों की ऊंचाई इतनी नहीं की मुझे गुरूर दे

मै मेरे व्यक्तित्व से और अपने फैसलों से खुश हूँ

कोई कितना भी उल्हाना दे मुझे मेरे फैसलों के लिए

चुना मैने हमेशा वही जो सबके लिए सही था

और हमेशा यही करुँगा नासमझे जाने का मुझे कोई भय नहीं 

तुम हो ना हो मै यही रहूँगा

जो सोचो मै बदल जाऊँगा तो तुम्हारा विश्वास मेरे लिए विश्वसनीय नहीं

तुम्हारी कल्पनाओं से परे हूँ मैं, तो कयास कोई लगाना नहीं

मुझसे प्रिय मेरे लिए कोई नहीं ये मेरा, मेरे प्रति करुणामय व्यवहार है

मै हूँ, मै था और मैं रहूँगा

कोई हो ना हो, कोई रहे ना रहे मै रहूँगा

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