फना होने की चाह!
गुज़ारिश
ऐ खुदा मुझे तू पाक कर दे,बादनाम गलियों में मेरी पहचान आम कर दे।।।
इतना सा तू इन बादनाम गलियों में रह रहे अपने बच्चों पे अहसान कर दे!!
हर रोज़ देखता हूं जहाँ आत्माओ कों जलते, गलते, कटते और मरते।
देखता हूँ इन गलियों में तेरे कुद्दरत के नियमों को भी असहाय लगते!!
सुनता हूँ धर्म के ढेकेदारो से तू भी इन गलियों से नज़रें चुरा लेता हैं अपनी
जहाँ तेरे बच्चे हर रोज़ हैं बिकते।
इन गलियों को जन्म देने वालों को देखा हैं मैंने अक्सर पूजते।
तेरी बरकत से वो हैं,समाज में भगवान बने फिरते।
ऐ खुदा अब इतना सा तू इन पे एहसान कर दे।
मुझे पाक कर दे और इन गलियों में नीलाम कर दे।।
इतना सा तू इन बादनाम गलियों में रह रहे अपने बच्चों पे अहसान कर दे!!
हर रोज़ देखता हूं जहाँ आत्माओ कों जलते, गलते, कटते और मरते।
देखता हूँ इन गलियों में तेरे कुद्दरत के नियमों को भी असहाय लगते!!
सुनता हूँ धर्म के ढेकेदारो से तू भी इन गलियों से नज़रें चुरा लेता हैं अपनी
जहाँ तेरे बच्चे हर रोज़ हैं बिकते।
इन गलियों को जन्म देने वालों को देखा हैं मैंने अक्सर पूजते।
तेरी बरकत से वो हैं,समाज में भगवान बने फिरते।
ऐ खुदा अब इतना सा तू इन पे एहसान कर दे।
मुझे पाक कर दे और इन गलियों में नीलाम कर दे।।
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