आज़ाद कर दूँ
मन करता हैं तुम्हे आज़ाद कर दूं।
दिलो दिमाग में कैद हो तुम कब से।
जी चाहता हैं, तुम्हे, तुम्हारे हवाले कर दूं।
इस रक्तबीज का अब नाश कर लूं।
तुम्हे आज़ाद कर दूं।
मिटा दूँ , तुम्हे पाने खाव्ब , तुम्हारी हर चाहत पे लिखा हो मेरा नाम, इन इरादों से दरकिनार कर लूं।
जी चाहता हैं तुम्हे आज़ाद कर दूँ।
अब और ना हो मन में कोई आस
रुहू अब ना रहे , तेरी अनुपस्थिति से उदास।
कुछ ना रहे बाकी, रुक जाए होंने वाले सब अहसास।
थक गई होगी तुम भी , मेरी याचनायें सुनकर ।
कई बार सुनकर भी अनसुना कर कर।
तुम्हें भी बेतहाशा दर्द होता होगा, तुम्हे भी असमंजस का शिकार होना होता होगा।
चलो तुम्हे आज आज़ाद कर दूँ।
मुझे कुबूल करो , हमसाथी बनाओ
तुम बनाओगी ना ? चुनोगी ना?
तमाम प्रश्नों से तुम्हे मुक्त कर दूँ।
इस मोड़ पे जी चाहता हैं , तुम्हे आज़ाद कर दूँ।
कोई कश्मकश ना हो तुम्हारे ज़हन में , रफ्ता रखने पर।
चलो तुम्हे आज आज़ाद कर दूं।
तुमसे ये बोझ उतारकर, तुम्हे हल्का कर दूँ।
चलो आज तुम्हे आज़ाद कर दूँ।
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