वापस मत आना
तुम्हारे साथ तो ख़ुशी से भी अब डर लगता है कि एक दिन कब साथ ले जाओ तुम
तो अब एक काम करना की तुम दूर ही रहना
तुम्हारे आने से जो खुशी मिलती है, उसके खो जाने का डर जो तुम साथ लाती हो
वो अब मुझे और बर्दास्त नहीं करना
एक काम करना, अब तुम दूर ही रहना
खुशी के बाद जो दर्द देकर तुम चली जाती हो हर बार
उस दर्द में खुद को और नहीं देखना
एक काम करना अब तुम दूर ही रहना
तुम्हारे साथ तो
ना खुशी का ही कोई पल चाहिए, ना गम की ही कोई छाया
अब कोई और नया अनुभव नहीं चाहिए
जैसे चल रहा है सब, बस इसे ऎसे ही चलने देना
कोई नया कयास लगाकर, मेरे हाल पूछने मत चली आना
एक काम करना, अब तुम दूर ही रहना
और वापस मत आना
तुम जो छोटी छोटी बातों को इतना बड़ा बना देती थी
एक एक महीने तक जो तुम उन मुद्दो पर ताने कसती थी
जंहा मैने तुम्हारे भाई के नाम से पहले शायद आप नहीं लगया था
और वो जब मैने तुम्हारे ऑफिस के नम्बर पर फोन किया था जिस नंबर से बस तुम फोन करती थी हर बार
और ना जाने कितने मर्तबा तुम्हारा फोन ना उठा पाने के लिए महत्ता की हिदायत, क्या, कोंन कितना महत्वपूर्ण है तुम्हारे लिए?
मेरा बहस में तुम्हें तू, तुझे बोल देना तो जैसे काले पानी की सज़ा जितना बड़ा जुर्म था
यूँ तो हमारे बीच कुछ नहीं था पर फिर भी ये सब मै नारदज कर रहा था
वो कटाक्ष करते हुए कितना आनंदित होती थी तुम कुछ बदले में अगर कहा दिया करता था तो उस जैसा कोई गुनाह ना था
एक बार मेरा फोन व्यस्त आना और तुम्हारा फोन ना ले पाने का मतलब होता था मै तुमसे प्यार नहीं करता
यही तुम कर दिया करती थी तो में शक्की इन्सान हो जाता
और वो तुम्हारा मुझे बार बार अपरिपक्व कहना अब मायने और ईशारे स्पष्ट हुए हैं,
जिसमें भी सब तुमने ही खोया है, एक अच्छा इंसान
तो ठीक है अब तुम दूर ही रहना
अच्छा ही है कि अब नहीं हो तुम यहाँ, और अब वापस भी मत आना
दुःखी हूँ तुम्हारे लिए जो भी सज़ा तुम्हारे लिए कुदरत ने चुनी है, उसके बीज़ तुमने ही बोए थे
ये तो याद है ना ,
तुम नहीं हो अब यहाँ कहीं, बस उल्हानो में रहोगी कहीं और बस वहीं रहना
बस अब एक और काम करना की वापस मत आना
सही सा लगता है अब तुम्हारा कहना सच में कुछ नहीं था, सब था तो बस मेरी ओर से
वो था हकीकत को नकारते हुए बस ख़्यालों में रहना
अब हकीकत में हूँ तो वापस मत आना
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