आत्मीय रिश्ता
आत्मीय रिश्ता
ज़िस्म हमारा, तुम्हारा किसी ओर के हवाले है
पर मन के मसले अभी ज़िन्दा है, कहीं बाकी है
वो एक, दूसरे के हवाले है
ये शराब नहीं जो मुझसे कहलवा रहीं हैं
इस हकीकत से कितना भी किनारा कर ले
कुछ ख्वाहिश जो अधूरी रहीं
वो आज भी दोनों के दरमियाँ है
और एक दूसरे को बाँधे है
जो सफर साथ किया था
उसकी यादें आज भी गुदगुदाती है
अक्सर मुस्कुराहट का कारण बन जाती हैं
आप कल भी यहाँ थे, आज भी यहाँ हो
हमारे बीच कभी ना ख़त्म होने वाला कुछ था
जो अनंत काल से है, और आज भी यहाँ बाकी है
ये एहसास कुछ अलग था जो हर मुलाकात के साथ बढ़ा
ऎसा लगता है, मै आपके पास कुछ छूट सा गया
कुछ मेरा आपके पास और आपका कुछ मेरे पास बाकी है
हमारे बीच के पवित्र रिश्ते के लिए कोई पवित्र नाम बनना अभी बाकी है
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