बेनाम रिश्ता

 तुम्हारा मेरा रिश्ता भारत पाक जैसा है

तुमसे अलगाव की ही उम्मीद है 

फिर भी मै शान्ति के प्रयास करता रहता हूँ

तुम्हें मै ग़लत लगता हूँ, मुझे तुम ग़लत लगते हो

तुम मेरा बुरा नहीं चाहते, मै तुम्हारा बुरा नहीं चाहता

फिर भी कश्मीर पर दोनों के बीच तना तनी बरक़रार है

कभी तुम हमले करते हो, कभी मै हमले करता हूँ

हो हिस्सा तुम मेरे ही, पर बिगड़े हुए हो तुम मेरे लाड में, शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने की बातें तो होती है पर अम्ल नहीं

कितने कश्मीर से मामले हमारे बीच जिंदा है

उन पर फैसले और फैसलों पर अम्ल के रास्ते नहीं मिलते

हर फैसले की कोशिश पर मिलते हैं तो बस और कुछ और फासले

ना तुम कभी अलग होना चाहते थे ना हम कभी

फिर भी आज विपरीत ध्रुव है, हर कश्मीर से मुद्दे पर

एक हिस्सा अलग हुआ तुमसे और उसे बांग्लादेश बनना पड़ा

फिर भी तुम नहीं समझे

अब कितने हिस्से अलग करोगे खुद से

कपटता भरी हर चाल तुम्ही पर भारी है

अभी तो आतंकवाद हैं

अब क्या सिविल वार का इंतजार बाकी है

एक रहकर राज कर सकते थे

यूरोपीयन, अमरीकन, रूस, फ्रांसिस को धूल ना समझते 

पर तुम मतलबी, तुम्हें तो बस खुद की तरक्की प्यारी हैं

उस तरक्की की उम्मीद में आज 

अमरीका, चीन को बाप बना के बैठे हो 

तुम खुदगरज खुद तो गुलाम बन गए हों 

हमे भी गुलाम बनाने के लिए आतंकवाद और तस्करी के बारूद के साथ आगे हो 

ये ध्यान रखो अभी भी सम्भाल जाओ, मेरा ही हिस्सा हो मान जाओ 

वो वक्त दूर नहीं जब आतंकवाद के जिस ढेर पर बैठ कर तुम धमका रहे हो 

वही आतंकवाद एक दिन इस पाकिस्तान को ही ना निगल ले 

तुम्हारे हाल भी कहीं जलालाबाद, दरजब, अचिन, काबुल ना हो जाए


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